Wednesday, December 29, 2010

पश्चिम बंगाल के हिन्दीप्रेमियों ,आपका स्वागत है

पश्चिम बंग हिंदी अकादमी के अलोकतांत्रिक पुनर्गठन के प्रतिवाद में पश्चिम बंग हिंदी भाषी समाज , प्रतिध्वनि, अपनी भाषा, शब्द कर्म विमर्श, साहित्यिकी, अभिनय और लिटिल थेस्पियन के संयुक्त तत्वावधान में वरिष्ठ कवि श्री ध्रुवदेव मिश्र 'पाषाण' की अध्यक्षता में दिनांक 25 दिसंबर 2010 को त्रिपुरा हितसाधिनी सभा , 3 सूर्य सेन स्ट्रीट,कोलकाता-700012 में आयोजित लोकतान्त्रिक कन्वेंशन में मिले सुझाव के आधार पर यह कदम उठाया गया है. ब्लॉग का सुझाव पश्चिम बंग हिंदी भाषी समाज के संरक्षक श्री प्रभात पाण्डेय ने दिया. यहाँ आप अपनी बात खुल कर कहें- केशव भट्टड़,मीडिया प्रभारी , पश्चिम बंग हिंदी भाषी समाज.

1 comment:

  1. [1] समाचार पत्रो में हिंदी अकादमी के पुनर्गठन पर तल्ख़ टिप्पणियां छपी है|इससे अकादमी की विश्वसनीयता संदेहास्पद हो गई है |

    [2] 2 नवंबर 2010 को हिंदी अकैडमी के गठन का Notification जारी हुआ लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार के सूचना और संस्कृति विभाग के राज्य मंत्री ने इसकी घोषणा नहीं की , क्यों ?

    [3] कोलकाता से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र में सूचना और संस्कृति विभाग के राज्य मंत्री का साक्षात्कार पढ़ा| अकादमी के कार्य शुरू करने से पहले ही उन्होंने अकादमी की कार्यसूची तय कर दी|

    ReplyDelete